ईसागढ़ का इतिहास
ईसागढ़, जिला अशोकनगर, मध्य प्रदेश

ग्वालियर रियासत का ऐतिहासिक क्षेत्र
ईसागढ़ का क्षेत्र स्वतंत्रता से पहले ग्वालियर रियासत के ईसागढ़ ज़िले का हिस्सा था। उस समय इस प्रशासनिक क्षेत्र में वर्तमान गुना और अशोकनगर जिलों के बड़े भाग तथा विदिशा जिले का कुछ हिस्सा शामिल था। ईसागढ़ इस क्षेत्र का प्रशासनिक मुख्यालय था।
स्थानीय इतिहास के अनुसार नगर का पुराना नाम ‘ओंडिला’ या ‘उंडा’ बताया जाता है। 1808 में राजा दुर्जन लाल खींची ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर इसका नाम बहादुरगढ़ रखा। 1811 में सिंधिया सेना के जनरल जीन बैप्टिस्ट फिलोज़ ने नगर पर अधिकार किया और इसे ईसागढ़ नाम दिया।
स्वतंत्रता के बाद
1947 में स्वतंत्रता के बाद ग्वालियर रियासत भारत में शामिल हुई और इसका क्षेत्र मध्य भारत का हिस्सा बना। पूर्व ईसागढ़ जिले के अनेक क्षेत्र बाद में गुना जिले में सम्मिलित हुए। 1 नवंबर 1956 को मध्य भारत का मध्य प्रदेश में विलय हुआ। 15 अगस्त 2003 को गुना जिले के विभाजन से अशोकनगर जिला बना, जिसमें ईसागढ़ आज एक तहसील के रूप में शामिल है।
ईसागढ़ के ऐतिहासिक स्थल
ईसागढ़ तहसील के कड़वाया गांव में गढ़ी, बावड़ी, मठ और 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित माने जाने वाले प्राचीन मंदिरों का समूह है। जिला प्रशासन के अनुसार यहां 15 प्राचीन मंदिर हैं और मंदिर परिसर संरक्षित स्मारक के रूप में अधिसूचित है।
